नौरोजी नगर के प्रसिद्ध पकोड़े हो या गीता भवन (ऋषिकेश) के दोनों का स्वाद कभी नहीं बदलता,पर जब आप नौरोजी नगर से गीता भवन पहुंचते है तो बहुत कुछ बदल जाता है,विशेषकर हमारी मनोदशा। 

जहां एक और हम दिल्ली में आपाधापी,भागमभाग वाला जीवन जी रहे होते है वही ऋषिकेश में पहुंचकर हमको एक ठहराव सा,एक सुकून सा अनुभव होता है।


यूँ तो मै कई बार बाइक द्वारा दिल्ली से  ऋषिकेश जा चुका हू परन्तु अबकी बार जाते समय अनजाने में ही जो रास्ता लिया वो काफी सुविधाजनक और मनोरम दृश्यो से भरा हुआ था क्योंकि यह नहर के किनारे- किनारे बनाया गया हुआ है। इसके अलावा इस रस्ते पर आपको बहुत सारे गांव भी मिलेंगें, थोड़ी देर ठहरकर आप वहाँ की जीवनशैली का भी अनुभव ले सकते है। 


इस रास्ते पर हम मोदीनगर से मंगलौर तक गये,सुबह की निकलती हुई धूप के साथ यह सफ़र काफी आनंददायी होता जा रहा था।


दिल्ली से सुबह ५ बजे निकलने के बाद रास्ते में २ जग़ह रुकते हुए  लगभग ११ बजे हम स्वामी दयानन्द आश्रम (ऋषिकेश ) में पहुंच गए थे। 

आश्रम के पास सुंदर गंगा तट पर स्नान किया उसके बाद आश्रम में बनने वाला सात्विक,सुस्वादिष्ट भंडारा खाने के बाद जानकी सेतु जो आश्रम के  बिलकुल पास में ही है, से पार होते हुए दूसरी तरफ चौरासी कुटिया,गीता भवन में थोड़ा घूमने के बाद,राम झूला,लक्ष्मण झूला के पास से निकलते हुए जा पहुंचे शिवपुरी जहाँ ओशो आश्रम में वहां पर होने वाली ध्यान किर्या और  रुकने के नियम कानून जाने,फिर  बाज़ार से घूमते हुए राम झूला से पार करके वापिस पहुंचे पर्मार्थ आश्रम। 

 


परमार्थ आश्रम के पास ही  ‘भारत साधु समाज योगाश्रम’ है जिसमे सस्ते में कमरा मिल जाता है ( र ३००-३५०) मै अक्सर वही पर ठहरता हु क्योकि यह जानकी सेतु,राम झूला के बीच में और गंगा तट के बिलकुल सामने है,जब भी हम कमरे के बहार देखते है तो माँ गंगा के दर्शन होते है। 


यू तो गंगा तट पर सुबह-शाम लगभग सभी आश्रम आरती करते है,पर शाम की आरती जो परमार्थ आश्रम के सामने होती है काफी भव्य है और इस समय काफी भक्त लोग यहाँ इकठ्ठे होते है,सकरात्मक ऊर्जा महसूस की जा सकती है।


गंगा तट पर रात के समय बैठना और चाय पीना भी एक संतुष्ट करने वाला अनुभव होता है तो हमने भी इसका आनंद लिया जब तक कि गंगा तट लोगो से खाली नहीं हो गया।


अगली सुबह गंगा स्नान के बाद लगभग ७ बजे नीलकंठ की तरफ यात्रा शुरू की जो २२ -२३  किमी थी। 

थोड़ी दूर चलने के बाद थोड़ा समय फूलचट्टी और पथरचट्टी गंगा तट पर भी रहे जो भीड़भाड़ से दूर जंगल में है,यहां से राफ्टिंग भी होती है।


इसके बाद घुमावदार रास्तों का आनंद लेते हुए हम नीलकंठ महादेव पहुंच गए।

अब से लगभग दो दशक पहले भी मै नीलकंठ महादेव मंदिर आ चुका था मैंने देखा अंदर से तो कुछ नहीं बदला पर बाहर से बहुत कुछ बदल गया या कहे सब कुछ ही बदल गया। 

वहाँ पर फोर्स भी काफी थी,मतलब सुरक्षा के बढ़िया इंतजाम है।


इसके बाद घुमावदार रास्तों का आनंद लेते हुए हम नीलकंठ महादेव पहुंच गए।

अब से लगभग दो दशक पहले भी मै नीलकंठ महादेव मंदिर आ चुका था मैंने देखा अंदर से तो कुछ नहीं बदला पर बाहर से बहुत कुछ बदल गया या कहे सब कुछ ही बदल गया। 

वहाँ पर फोर्स भी काफी थी,मतलब सुरक्षा के बढ़िया इंतजाम है।


अपने वाहन से घूमने जाने पर सबसे बड़ा लाभ यही होता है कि हम कही आसपास भी जा सकते है,तो हम भी निकल गए महादेव मंदिर से आगे गणेश मंदिर और उससे आगे झिलमिल गुफा। 

यहां पर माहौल एकदम शांत है,आप महसूस कर सकते है चुपचाप बैठकर प्रकृति और प्राकृतिक रूप से बनी चीजों को देखना कितना सुकून देने वाला होता है।


नीलकंठ मंदिर से वापिस परमार्थ आश्रम आने में ज़्यादा समय नहीं लगा लगभग दोपहर १ बजे लंच के समय पहुंच गए क्योंकि डिनर इतना अच्छा था तो लंच भी इधर ही करने का मन था और देखना था कि अब लंच कैसा होगा?

बता दे लंच, डिनर से भी अच्छा था। कटहल की सब्ज़ी तो बहुत ही अच्छी तरह बनाई हुई थी। 


इसके अलावा और आश्रमों में घूमते हुए दोपहर ३ बजे वापस दिल्ली की तरफ प्रस्थान किया। 

रास्ते में ३ जग़ह ढ़ाबो पर चाय पिते हुए हम लगभग रात  ९.३० बजे दिल्ली पहुँच गए,बिलकुल रिफ्रेश,रेजुवेनेट,रिकवर होकर !


कुछ सुझाव : 

  • साथ में कम से कम सामान ले, केवल जरूरत भर का। 
  • यात्रा पर निकलने का समय सुबह-सुबह ४-५ बजे सबसे उपयुक्त रहता है,उगते हुए सूर्य देव के दर्शन भी हो जाते है, जो की महानगरों में रहने वालो को कम ही हो पाते है। 
  • कपड़े,समान की पैकिंग रात में ही कर लेनी चाहिए,सुबह तो बस बैग उठाओ और चलो।  अपने वाहन की सर्विस भी देख लेनी चाहिए।
  • रास्ते का आनंद ले मंज़िल पर पहुँचने की हड़बड़ी बिल्कुल न करे,मतलब आराम से चले पर चलते रहे। 
  • रास्ते में कम से कम खाये और खाना ही हैं तो फल खाये,भूख मिटाने का अच्छा उपाय है। परन्तु पानी पीने में बिलकुल भी कंजूसी न करे।
  • लंगर या आश्रम में खाना खाने का अपना ही एक आनंद है,थोड़ा सर्च करे,लोकल लोगो से पूछताछ करे बिना किसी शर्म के। 
  • मिलनसार और सौम्य स्वभाव रखे,क्षमा भाव हमेशा शांतिदायक होता है,क्योंकि यात्रा में भिन्न-भिन्न प्रकार के लोग मिलते है। 

THE WORLD IS A BOOK,AND THOSE WHO DO NOT TRAVEL READ ONLY ONE PAGE.                                                                                                                                                   (Saint Augustine)


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कभी कभी खासकर जब हम सफ़र में होते है रोड साइड स्ट्रीट फ़ूड देख कर हमारा मन भी कुछ करारा सा खाने का करता है तो आज उसी बात को ध्यान में रखते हुए  बनाते है कुछ ऐसा जो करारा भी हो,और हेल्थी होने के साथ चलते फिरते बनाया जा सके।  

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बनाने की विधि -

सामग्री-

मैदा-१२० ग्राम 

अजवाइन-२ ग्राम 

घी-३ चम्मच 

तेल -तलने  के लिए 

 

मूंग दाल -१००  ग्राम 

हल्दी-१० ग्राम 

प्याज़-२ न. 

टमाटर-२ न. 

नीबू-४ न. 

हरी मिर्च-७-८ न. 

अदरक १० ग्राम 

हरा धनिया -१५ ग्राम 

गुड़-५० ग्राम 

इमली-५० ग्राम 

काला नमक 

नमक 

अनार-१ न. 

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मैदा में अजवाइन और घी डालने के बाद थोड़ा सा नमक डाल कर थोड़ा थोड़ा पानी डालते हुए सख्त सा गूँथ लेते है। कपडे से ढककर २०-२५ मिनट के लिए छोड़ देते है। 

मैदा की छोटी या बड़ी जैसी भी मर्जी करारी सी पूरी बना लेते है। याद रखना है पूरिया फुले नहीं इसके लिया इनमे तलने से पहले ही फोर्क की सहायता से छेद कर ले।

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मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर गरम पानी में ३-४ घंटे के लिए भिगो दें ताकि वो पानी पीकर  नरम  हो जाये। 

अब दाल को हल्दी और थोड़ा सा नमक पानी में  डाल कर उबाल लेते है पर इतना ही की वो बस पक कर सॉफ्ट हो जाये मैश नहीं करना है। 

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इमली और गुड़ को थोड़े पानी के साथ पका लेते है छानकर थोड़ा सा काला नमक मिला कर इस चटनी को भी रख लेते है।

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प्याज़,टमाटर,हरी मिर्च,अदरक,हरा धनिया सभी को बारीक़ काट लेते है। 

पुरिया (पकवान ) तैयार है दाल और सब्ज़ियों का मसाला भी ,बस अब अरेंज ही तो करना है। 

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जब भी खाने का मन करे तब-उबली दाल,कटी सब्ज़िया,नीबू,नमक,इमली चटनी मिलाकर मसाला सा बना ले। 

इस मसाले को पूरी के ऊपर रखे और थोड़े अनार के दाने और आनंद ले इस चलती फिरती चाट का। 

 

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कढ़ाई पनीर हम में से ज़्यदातर लोगो  की पसंददीदा सब्ज़ी होती है। यदि हम इसको रोटी  के साथ न खाकर किसी हरी सब्ज़ी के साथ खाये तो कैसा रहे ?

तो चलो आज कढ़ाई पनीर को पत्ता गोभी में भरकर बनाते है। 

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बनाने की विधि -

सामग्री -

 

पत्तागोभी -१ न. (बड़ा साइज़ )

पनीर -१२० ग्राम 

शिमला मिर्च -१ न. 

प्याज़ -१ न. 

टमाटर -२ न. 

हरा धनिया -२० ग्राम 

अदरक -५ ग्राम 

सरसो का तेल -३ चम्मच 

धनिया दाना -७ ग्राम 

साबुत  लाल मिर्च -१ न. 

हल्दी -४ ग्राम 

कश्मीरी मिर्च पाउडर -७ ग्राम 

धनिया पाउडर -५ ग्राम 

गरम मसाला -४ ग्राम 

नमक 

सिल्वर फॉयल 

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पत्ता गोभी को डंठल वाली साइड से काटने के बाद उसके पत्ते निकल लेते है। 

पत्तो को उबलते पानी में थोड़ी देर डालने के बाद ठन्डे पानी में डाल कर छोड़ देते है। 

थोड़ी देर बाद पत्तो को पानी से निकाल कर छान देते है। 

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पनीर को बारीक़ क्यूब में काट लेते है। 

इसी साइज में प्याज़,टमाटर,शिमला मिर्च को भी काट लेते है। 

अदरक और धनिया को बारीक़ चोप क़र  लेते है। 

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पैन में तेल गरम  करके साबुत  लाल मिर्च और धनिया दाना को बेलन से क्रश करके डाल देते है। 

अब कटी हुई प्याज़,शिमला,टमाटर,अदरक  को डाल कर थोड़ी देर भुनने के बाद पनीर भी डाल देते है। 

अब हल्दी पाउडर,कश्मीरी मिर्च,धनिया पाउडर भी डाल क़र थोड़ी देर धीमी आंच पर भुनने के बाद नमक और गरम मसाला भी डाल देते है। अब कटा हुआ धनिया भी मिला देते है। 

गैस बंद करके थोड़ी देर ठंडा होने के लिए छोड़ देते है। 

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अब पत्ता गोभी के पत्तो को बिछाकर इस पनीर की सब्ज़ी को उसके ऊपर डाल कर रोल क़र  लेते है।  

बहार से सिल्वर फॉयल में लपेट कर फ्रीज़र में  भी रख सकते है। 

इसको पैन में गरम करके,स्टीम करके या माइक्रोवेव में भी गरम करके जब मर्जी खाया जा सकता है। 

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हमारे देश में सबसे ज़्यादा लोगो द्वारा खाया जाने वाला किया जाने वाला खाना -दाल चावल ही है। 

रात में यदि खाना खाने के बाद आपके पास दाल और चावल बच जाये तो आप इस रेसिपी को बनाया  सकता है।

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बनाने की विधि -

सामग्री-

 

बचे हुए -

दाल १ बाउल   

चावल १/२ बाउल 

 

मूंग दाल -८०  ग्राम 

आलू (उबले हुए )

बेसन ५० ग्राम 

ब्रैड क्रम ५० ग्राम 

हरी मिर्च २ न. 

अदरक १० ग्राम 

गरम मसाला ५ ग्राम 

नमक 

तेल -तलने  के लिए 

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मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर गरम पानी में ३-४ घंटे के लिए भिगो दे  ताकि वो सोफ्ट हो जाये। 

बची हुई दाल को किसी छननी में डाल क़र पानी निकलने के लिए रख दे या कपडे में दबा क़र भी पानी को निकल सकते है। 

मिर्च और अदरक को बारीक़ काट लेते है। आलू को मैश क़र ले। 

एक बाउल में छनी हुई दाल और उबले हुए चावल (थोड़े बचा लेते है ) आलू,बेसन,ब्रेड क्रम,मिर्च,अदरक,गरम मसाला स्वादानुसार नमक डाल क़र मिला ले। 

मिक्सर की छोटी छोटी बॉल बना लेते है। 

भीगी हुई मूंग दाल को छान लेते है और बचे हुए चावल के साथ मिला लेते है। 

अब इन बॉल्स को इस दाल चावल के ऊपर रोल करते हुए एक कोटिंग बना लेते है। 

अब दोनों हथेलियों से दबाकर टिक्की की तरह बना लेते है। 

अब टिक्कियों को तेल गरम करके फ्राई लेते है 

कबाब तैयार है अपनी मनपसंद सॉस के साथ खाये। 

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सब्ज़ियों के पकोड़े तो हम अक्सर खाते  ही रहते है आज  कुछ नया बनाते है जो बनने में भी आसान हो साथ ही साथ पौष्टिक और स्वादिस्ट भी हो। 

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पालक -हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में पालक प्रमुख है। यह शरीर में लोह तत्व की कमी को पूरा करता है विशेषरूप से महिलाओ के लिए पालक बहुत ही फायदेमंद है। 

महिलाओ में लोह तत्व की कमी अधिक होती है और उन्हें इसकी ज़्यादा जरूरत होती है। इसके अलावा यह शरीर में विटामिन ए,कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों की कमी को भी पूरा करता है। 

 

पोहा बहुत ही जल्दी तैयार होने वाला पौष्टिक खाना है। यह एक हल्का आहार है और इसी कारण शरीर द्वारा आसानी से पचाया जा सकता है इसलिए पोहा का सेवन पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा रहता है। 

पोहा में आयरन की मात्रा काफी होती है जिसके कारण शरीर में आयरन की कमी को दूर किया जा सकता है इसलिए गर्भवती महिलाओं के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है। 

आयरन शरीर के लिए बहुत ही जरूरी मिनरल है जो हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। पोहा कार्बोहाइड्रेट के साथ साथ फाइबर का भी अच्छा स्रोत होता है।

 

बेसन -जैसा की हमको पता है,बेसन चना दाल का आटा है और चना प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है, जो शरीर को भरपूर ताकत देता है।  यह एक अत्यधिक पोषक आहार है।

यह विटामिन थायमिन का एक अच्छा स्रोत है जो भोजन को शरीर में  ऊर्जा परिवर्तित करने में मदद करता है। 

इसमें विटामिन बी ६ पाया जाता है जो न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन के संश्लेषण में एक महत्वपूर्ण घटक है जिससे भूख और मूड दोनों ही ठीक रहते है। 

बेसन रक्तचाप को ठीक करने में भी सहायक है क्योंकि इसमें स्वाभाविक  रूप से सोडियम की मात्रा काफी होती है। 

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बनाने  की विधि 

सामग्री 

 

 

पालक 250 ग्राम 

पोहा २५० ग्राम  

मूंगफली  ५० ग्राम 

बेसन १०० ग्राम 

अजवाइन १० ग्राम 

सरसो दाना ८ ग्राम 

करी पत्ता ५ न. 

प्याज़ ५० ग्राम 

हरी मिर्च २ न. 

सैंधा नमक 

काला नमक 

तेल-तलने के लिए

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पालक को अच्छी तरह धोकर लम्बा लम्बा काट ले और  प्याज़ को भी। 

हरी मिर्च को बारीक़ काट ले। 

पोहा को धोकर छान ले। 

मूमफली को बेलन  की साहयता से बारीक़ (क्रश) कर ले। 

बेसन में अजवाइन डालकर घोल बना ले। 

पैन को गरम करके थोड़े से तेल में सरसों दाना और करी पत्ता डालने के बाद पोहा और हरी मिर्च डाल क़र धीमी आंच पर थोड़ी देर भून ले। 

बेसन के घोल में पालक,प्याज़,सैंधा और काला नमक़ और भुना हुआ पोहा डाल क़र मिला ले। 

तलने के लिए तेल गरम करे और छोटी छोटी मात्रा तेल में डाल कर पकौड़े तल ले। 

एक बार तेल से निकाल कर दोबारा करारे होने तक फ्राई करें। 

अपनी मनपसंद सॉस के साथ गरमागरम खाए। 

 

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साबूदाना का नाम सुनते ही दिमाग में सफ़ेद रंग के बीज या मोती जैसे खाद्य पदार्थ की तस्वीर उभरकर आती है। अक्सर व्रत और उपवास में सामान्य भोजन का त्याग कर दिया जाता है और इसके स्थान पर साबूदाने के पकवानो का सेवन किया जाता है। व्रत के अलावा भी साबूदाने का उपयोग कई व्यंजनों में किया जाता है। 

शकरकंदी- शकरकंदी में आयरन,मैग्निसियम,कार्बोहैड्रेट, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स,फास्फोरस, विटामिन सी, बीटा कैरोटीन और ज़िंक पाए जाते है। 

शकरकंदी मधुमेह में भी खाया जाना वाली सब्ज़ी है।

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बनाने की  विधि 

सामग्री :

शकरकंदी ५०० ग्राम 

साबूदाना ८० ग्राम 

बेसन (कुटु का आटा ) १ कप 

हरी मिर्च २ न. 

अदरक २० ग्राम

करीपत्ता ५ ग्राम

सरसोदाना ५ ग्राम

सरसो का तेल १५ मिली 

सैंधानमक

तेल -तलने के लिए 

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सबसे पहले शकरकंदी को उबाल क़र छील ले और छोटे छोटे टुकड़ो में काट ले। 

साबूदाने को एक दो बार धोकर पानी में ही भिगोकर रख दे। 

हरी मिर्च और अदरक को बारीक़ काट ले। 

कढ़ाई में तेल गरम करे और सरसो और करीपत्ता को डाल दे। 

तड़कने के बाद साबूदाने को पानी से छानकर डालें और अच्छी तरह भून ले अब कटी हुई शकरकंदी और हरी मिर्च को भी डाल दे साथ में अदरक को भी। 

स्वादानुसार नमक डाले और थोड़ी देर और भून ले। 

अब थोड़ा  मिलाकर छोटे छोटे पेड़े (बॉल्स ) बाना ले। 

बेसन में थोड़ा सा नमक डाल क़र एक  घोल बना ले। 

अब इन बॉल्स को घोल में डुबाए और फ्राई करे। 

थोड़ी देर के लिए फ्राई करने के बाद निकल ले और पुनः जब खाना  फ्राई करे। 

अपनी मनपसंद चटनी के साथ खाये। 

 

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जड़ीबूटियों का हमारे दैनिक जीवन में विशेष महत्व है क्योंकि ये हमारे स्वास्थ्य को अच्छा रखने में बहुत  ज़्यादा सहायक है। इसके साथ साथ ये हमारे खाने के स्वाद को भी विकसित करती है।

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हरा धनिया-धनिया डाइट्री फाइबर्स का  एक प्रमुख सोर्स है. इसके अलावा इसमें मैगनीज, आयरन, मैग्न‍िशियम भी भरपूर मात्रा में होता है. ये विटामिन सी, विटामिन के और प्रोटीन का भी अच्छा सोर्स है. इसमें थोड़ी  मात्रा में कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, थायमिन और कैरोटीन भी पाया जाता है.

ये स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले कोलेस्ट्रॉल को कम करने और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है.

पाचन तंत्र के लिए भी ये विशेष रूप से अच्छा  है, ये लीवर की सक्रियता को बढ़ाने में मदद करता है.

डायबिटीज के मरीजों के लिए भी ये काफी फायदेमंद होता है. ये ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने का काम करता है.

धनिया एक शक्तिशाली प्राकृतिक सफाई करने वाला है। शरीर से भारी धातुओं और जहरीले तत्वों को साफ करने के लिए इसका प्रभावी ढंग से उपयोग होता है।  धनिये का प्रयोग एलर्जी,मूत्राशय की जलन और त्वचा से सम्बंधित एलर्जी की सूजन का इलाज करने के लिए किया जाता है। इससे जीवन शक्ति में सुधार होता है और दर्द घट जाता है। लौहतत्व और विटामिन ए, बी और सी से भरपूर,इसका भोजन में इस्तेमाल होने पर यह पौष्टिक मूल्य बढ़ता है। भोजन की पाचन शक्ति बढ़ जाती है और भूख काम हो सकती है। 

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तुलसी - तुलसी एक बहुत ही गुणकारी औषधि है,शायद अपने इन्ही गुणों कारण के तुलसी का इतना ज़्यादा पौराणिक महत्व है,ज्यादातर हिन्दू परिवारों में तुलसी की पूजा की जाती है ऐसे सुख और कल्याण के तौर पर देखा जाता है। इसका प्रयोग कई बीमारियों में है यह सर्दी खांसी से लेकर कई बड़ी बीमारियों में कारगर औषधि है। 

आयुर्वेद में भी तुलसी को स्वास्थ्य के  लिहाज से बहुत फायदेमंद बताया गया गया है। 

आमतौर पर घरो में दो तरह की तुलसी देखने को मिलती है। एक जिसकी पत्तियों का रंग थोड़ा हल्का लाल सा  होता है और दूसरा जिसकी पत्तियों का रंग हरा होता है।

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पुदीना-पुदीने को गुणों की खान माना जाता है. साधारण-सा दिखने वाला ये पौधा बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी प्रभाव रखता है. पुदीने की पत्ती में कई औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं. 

इसका एंटी-बैक्टीरियल गुण भी इसके फायदों में इजाफा करने का काम करता है।बदलते मौसम की वजह से त्वचा का रूखा होना स्वाभाविक है. इस रूखेपन से बचने के लिए रोज के खाने में पुदीना शामिल करें।  इससे भरपूर एंटीऑक्सीडेंट मिलेगा और त्वचा का निखार बरकरार रहेगा । 

पुदीने में पोटैशियम, मैग्नेशियम,कैल्शियम, फॉस्फोरस,विटामिन ए , सी,आयरन की मौजूदगी शरीर के लिए लाभकारी बनाता है। 

पुदीने में मौजूद मेंथोल माइग्रेन के सिरदर्द  को कम करने में मदद कर सकती है। यह संवेदनशीलता, मतली और जी मचलने के लक्षणों को भी कम कर सकता है। 

पुदीने की पत्ती पेट की मरोड़, पेचिश और खट्टी डकारों में भी लाभकारी हो सकती हैं। इससे मोशन की समस्या ठीक हो जाती है और पेट भी साफ रहता है।

पुदीने में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण सर्दी-जुकाम और साइनस से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में सहायक है। मेंथोल की वजह से आप को महसूस होगा की आप आसानी से सांस ले पा रहे हैं।

कुछ स्टडीज द्वारा पता चलता है कि पुदीना भूख  को कम कर देता है, जिसके कारण आप कम खाएंगे और आपका वजन भी नहीं बढ़ेगा।

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बनाने की विधि 

सामग्री -

 

आलू  १ कि ग्राम 

हरा धनिया १०० ग्राम

तुलसी ५० ग्राम

पुदीना ३० ग्राम

हरी मिर्च ५ न. 

अदरक ५० ग्राम

भुना चना पाउडर १०० ग्राम 

कोर्नफ्लौर ८० ग्राम   

ओरगेनो (dry) १० ग्राम

मोटी कुटी मिर्च (chiili flaks ) १५ ग्राम 

सैंधा नमक 

तेल -तलने लिए 

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आलुओ को अच्छी तरह धोकर लबाई में काट ले। 

नमक के पानी में डुबो कर २०-२५ मिनट तक छोड़ दे। 

भुना चना पाउडर,हरा धनिया,पुदीना,तुलसी,हरी मिर्च,अदरक को मिक्सर में डाल कर पीस ले। 

कटे हुए आलुओ को पानी से निकल ले और ये पीसा हुआ मसाला और कॉर्नफ्लोर,ओरगेनो,कुटी मिर्च और नमक को मिला दे और थोड़ा थोड़ा पानी भी  मिलाते रहे जिससे आलू के टुकड़ो पर एक परत सी आ जाए। 

मध्यम गरम तेल में इन आलुओ को तल ले। 

करारे आलू तैयार है।

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